एसटीएफ ने ठान लिया था कि विकास दुबे को मौत के घाट उतारना है। पुलिस वालों में था गुस्सा।

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दो जुलाई को कानपुर के चौबेपुर थाने के बिकरु गांव में विकास दुबे द्वारा 8 पुलिसकर्मियों को मारने वाला विकास दुबे आज सुबह एनकाउंटर में मारा गया।
दरअसल विकास दुबे द्वारा 8 पुलिस वालों को मारने के बाद यह साफ था कि अगर विकास दुबे यूपी पुलिस के हाथ लग तो उसका एनकाउंटर पक्का है । लेकिन उज्जैन में गिरफ्तार होने के बाद माना जा रहा था कि अब पुलिस के लिए विकास का एनकाउंटर आसान नहीं होगा । लेकिन , गिरफ्तारी की अगली सुबह उज्जैन से यूपी लेन के क्रम में ही विकास दुबे का एनकाउंटर कर दिया गया ।
यही नहीं पुलिस ने इस घटना से जुड़े सभी लोगों को एनकाउंटर में मार गिराया जिनमे विकास के पांच साथी जो इसमें शामिल थे उन सभी को एनकाउंटर में मारा गया।
एडीजी (लॉ एंड आर्डर) ने कहा था की इस हत्याकांड के आरोपियों को ऐसी सजा देंगे जो मिसाल बनेगी कानपुर हत्याकांड से लेकर विकास एनकाउंटर तक यूपी पुलिस लगातार सवालों के घेरे में रही ।
इन सवालों से छुटकारा पाने और जवाब देने तथा सरकार का बचाव करने के लिए एडीजी प्रशांत कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। एडीजी के इस बयान से यह साफ हो जाता है कि यूपी पुलिस किसी भी हाल में विकास दुबे का एनकाउंटर करना चाहती थी। इधर सरकार ने भी पुलिस को फ्री हैंड दे दी थी।

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