आर्मी कैंटीनों में विदेशी शराब पर सरकार ने लगाया प्रतिबंध, जानिए कारण।

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नई दिल्ली। मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान की ओर एक और कदम हुए देशभर में आर्मी कैंटीन्स में विदेशी सामान आयात न करने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार ने जिन सामानों का आयात रोकने के आदेश दियें हैं, उनमें महंगी विदेशी शराब भी शामिल है।

माना जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्थानीय वस्तुओं को बढ़ावा देने के मकसद से लिया है। केंद्र सरकार यह फैसला लेने से पूर्व इस बारे में तीनों सेनाओं से सलाह ली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में करीब 4 हजार आर्मी कैंटीन हैं। जिसमे सेना के जवानों को डिस्काउंट रेट्स पर सामान मिलता है। जिसमे मुख्य रूप से फायदा वर्तमान और पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मिलता है।

कैंटीन में आमतौर पर विदेशी शराब और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की मांग ज्यादा रहती है। सरकार के इस फैसले के बाद अब आर्मी कैंटीन में विदेशी सामान नहीं बेचा जायेगा। इनमें विदेशी शराब भी शामिल है। जानकारी के लिए बता दें की आर्मी कैंटीन देश की सबसे बड़ी रिटेल चेन्स में से एक है। इनमें हर साल करीब 200 करोड़ रुपए की बिक्री होती है।

19 अक्टूबर 2020 को रक्षा मिनिस्ट्री ने विदेशी वस्तुओं के आयात पर बैन लगाने का आदेश जारी किया। जिसमे कहा गया कि- डायरेक्ट इम्पोर्ट नहीं किया जा सकेगा। ऑर्डर के अनुसार, इस बारे में आर्मी, एयरफोर्स एवं नेवी से मई और जुलाई के बीच वार्ता की गई थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल के तहत लिया गया फैसला है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

आपको बता दें कि ऑर्डर में फिलहाल उन सामानों यानी प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं दी गई है, जिनके आयात पर बैन लगाया जाएगा। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इसमें विदेशी शराब शामिल है। कैंटीन में बिकने वाले सामानों में करीब 7% प्रोडक्ट्स इम्पोर्टेड होते हैं।

इनमें चीन से आयात किए जाने वाले सामान जैसे डाइपर्स, वैक्यूम क्लीनर, हैंडबैग और लैपटॉप शामिल हैं। विदेशी शराब सप्लाई करने वाली दो कंपनियों को जून से ही ऑर्डर मिलने कम हो गए थे।

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